कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आजि मराठीचा दिनु! | Sumant Juvekar | 2 | |
| मानव प्रगल्भ अनसुय कधीच होणार नाही ? | माहितगार | 2 | |
| अंबानींची फणी | खिलजि | 2 | |
| कांताला सुरु झाल्या वांत्या | खिलजि | 2 | |
| माय मराठी | bhagwatblog | 3 | |
| माय-(मराठीची) पोएम | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| भादरायला हवे वाढलेले, भादरायला गेलो | खिलजि | 9 | |
| शेतकी कॉलेजचे दिवस | बबु | 4 | |
| बघुनी तुझी ती रंगीत अम्ब्रेला | खिलजि | 2 | |
| ग चांदण्यांनो | चांदणे संदीप | 6 | |
| एकदा प्रेमी राधा कृष्ण होऊन पहावे. | माहितगार | 4 | |
| मिळालं का तुला माझं प्रेमाचं फूल सेंट केलेलं ? | खिलजि | 5 | |
| गणित.. | प्राची अश्विनी | 21 | |
| केयलफिड्डी! | चलत मुसाफिर | 4 | |
| परकीमिलन | माहितगार | 2 | |
| मिलिंदमिलन | मायमराठी | 8 | |
| रोमांचक भूल ! | अविनाशकुलकर्णी | 6 | |
| लयीत एका झुलवीत | बिपीन सुरेश सांगळे | 1 | |
| कोण कुठली रोहिणी | Rohini Mansukh | 4 | |
| एकदाच ओलांडून अंतर... | प्राची अश्विनी | 15 |