कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| हमसे तो छूटी महफ़िलें… | मनिष | 13 | |
| भाषा | कुमार जावडेकर | 2 | |
| स्वतःसाठी जगू नका | नायकुडे महेश | 2 | |
| सीता रागाने हनुमंताला "तुझ्या आईची छूत्री " म्हणाली | खिलजि | 0 | |
| " माफ करा राजे " | mukund sarnaik | 2 | |
| मैत्री | तृप्ति २३ | 0 | |
| शिवाजी महाराज | mukund sarnaik | 0 | |
| " माफ करा राजे " | mukund sarnaik | 0 | |
| षंढ | चिनार | 4 | |
| असे षंढ आम्ही कैसे निपजलो | ज्ञानोबाचे पैजार | 15 | |
| संदीप खरे यांची माफी मागून.... | उपेक्षित | 0 | |
| ते दोघे | शिव कन्या | 2 | |
| आजही... | नायकुडे महेश | 0 | |
| खेळ राजकारणी असा रंगला.... | स्पार्टाकस | 4 | |
| सोनियाच्या पोटी आले तुझ्या पाठी.... | स्पार्टाकस | 10 | |
| अर्रे कोण म्हणतं इतिहासजमा झाली झाशीची राणी | खिलजि | 2 | |
| प्रपोज डे | अविनाशकुलकर्णी | 0 | |
| एकमुखाने बोला बोला नमो जयजयगान | अज्ञात | 20 | |
| सोनियाच्या सुता तुला खानदानी वरदान.... | स्पार्टाकस | 22 | |
| ऋतू ! | फिझा | 3 |