कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| स्कॉसपूस प्येग बाबा , स्कॉसपूस प्येग ( अर्थातच प्रेरणा ) | खिलजि | 6 | |
| अस्साच जळत राहिलास तर , जाताना पाणी पण महाग होईल | खिलजि | 9 | |
| माझ्या ब्लाॅगचा उदयास्त | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| मुका मार अनवरत झेलुनी | अनन्त्_यात्री | 4 | |
| जालफ्रेझीची सोय | खिलजि | 3 | |
| लाल करा ओ माझी लाल करा | खिलजि | 19 | |
| असाही ऊपदेश | शाली | 0 | |
| (साहेब असेच) ठोकत राहा | खिलजि | 2 | |
| जे घडलं प्रेमात माझ्या , ते तुला सांगूनही कधी कळलंच नाही | खिलजि | 0 | |
| माझ्या महाराष्ट्राचं गाणं | अनन्त्_यात्री | 3 | |
| तप्त झाली धारा सारी , दहाही दिशा त्या पेटल्या | खिलजि | 3 | |
| कविची गाडी | प्रदीप | 6 | |
| हा असा राम की ज्याच्या हजार सीता | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| सालं, आज जीव कासावीस झालाय | खिलजि | 5 | |
| अनघड शब्दांनो.. | अनन्त्_यात्री | 4 | |
| सत्वर | शिव कन्या | 2 | |
| बाई पलंगावर बसून होती | खिलजि | 10 | |
| मी स्वप्न पाहत नाही | खिलजि | 6 | |
| असं वाटतं ! | श्वेता२४ | 16 | |
| रक्त त्या डोळ्यातले सांगा पुसावे मी कसे? | विशाल कुलकर्णी | 2 |