कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| वरुणदेवाने फालतू त्याची जात दावू नये | गंगाधर मुटे | 83 | |
| पाप आणि पुण्य | sunrise | 3 | |
| फैसला | drsunilahirrao | 6 | |
| विलक्षण कविता - असाध्य वीणा | शुचि | 17 | |
| आयुष्याचे सात वार | sunrise | 5 | |
| छन्दोरचना | माहितगार | 8 | |
| संशय | जातवेद | 2 | |
| माझं मत कुणाला..... | निलरंजन | 2 | |
| कचरा | विवेकपटाईत | 7 | |
| निवडणुकीचा बिगुल . . . | संचित प्रमोद कुलकर्णी | 0 | |
| रूमानी | अनाम | 18 | |
| एकटा जगी मी उरलो | निलरंजन | 2 | |
| <पहिली धार> | प्यारे१ | 21 | |
| राधा | चिनार | 5 | |
| एक काहीतरी…… | चिनार | 4 | |
| प्रीतीची पारंबी | गंगाधर मुटे | 1 | |
| मी तुझ्या ऐन्यात होतो नेहमी | drsunilahirrao | 0 | |
| सदिच्छा : शुद्धी, वृद्धी, शुद्धी !! | निमिष सोनार | 3 | |
| नाते | अमेय६३७७ | 9 | |
| लोकशाहीचा सांगावा | गंगाधर मुटे | 1 |