कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| डर्बी लाजिरवाणी (मॅन्चेस्टर युनायटेड च्या पराभवाचं गीत) | वेल्लाभट | 17 | |
| सूर्य थकला आहे | गंगाधर मुटे | 1 | |
| देव पाहिलेला माणूस | ज्ञानोबाचे पैजार | 1 | |
| रंग आणखी मळतो आहे | गंगाधर मुटे | 3 | |
| ही अता विद्रोह करते कातडी | drsunilahirrao | 3 | |
| "चिडकी चिऊताई -" (बालकविता) | विदेश | 3 | |
| मी परदेशी | अज्ञातकुल | 0 | |
| भिऊ नकोस मी आहे तुझ्यापाठी | आयुर्हित | 5 | |
| भजन - महागाई | वेल्लाभट | 4 | |
| नसतील शब्द जिवंत जर का | वैभवकुमारन | 0 | |
| कंपासपेटी | मंदार दिलीप जोशी | 3 | |
| ओळख पाहू -होळीमय चारोळ्या | विवेकपटाईत | 1 | |
| तुझ्या गुन्ह्याचे अजून कोठेच नाव नाही | drsunilahirrao | 10 | |
| सुराई | drsunilahirrao | 3 | |
| आयचाघोरसचा सिद्धांत | मंदार दिलीप जोशी | 27 | |
| 'बाळाची शर्यत-' (बालकविता) | विदेश | 3 | |
| तुझे युद्ध हे छान समृद्ध झाले | drsunilahirrao | 17 | |
| चला, असाही एक वाढदिवस... | अजय जोशी | 1 | |
| क्षितिज | सार्थबोध | 0 | |
| तू अता ये याच रस्त्याने तुझ्यापाशी ... | drsunilahirrao | 0 |