कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| सावित्रीच्या लेकी - महिला दिना निमित्त | नेत्रा वैद्य | 2 | |
| पौरुषी... | अत्रुप्त आत्मा | 22 | |
| आदिशक्ती.... | स्मिता श्रीपाद | 6 | |
| २०१४ इलेक्शन स्पेशल - चार ओळी | अमोल केळकर | 2 | |
| बघता बघता देवा - | विदेश | 8 | |
| मी तुझा चंद्र झालो | मंदार दिलीप जोशी | 1 | |
| खिचडी बिघडली - विडंबन | नेत्रा वैद्य | 3 | |
| निवडणूका जवळ आल्या सारखे वाटतंय | निलरंजन | 0 | |
| चालत राहणार | विवेकपटाईत | 1 | |
| मायमराठी | सार्थबोध | 1 | |
| मराठी भाषा | Bhagwanta Wayal | 1 | |
| श्वास लय | अज्ञातकुल | 0 | |
| .......! | स्पंदना | 36 | |
| वसुधैव कुटुंबकम | आयुर्हित | 0 | |
| स्विकार... | अत्रुप्त आत्मा | 32 | |
| (कश्या कश्याला मुकलो ते...) | धन्या | 6 | |
| अस्वस्थता अस्वस्थता | पंडित मयुरेश नागेश्वरम देशपांडे | 2 | |
| 'पालखी' | drsunilahirrao | 0 | |
| वळुन जे बघतेस त्याचा त्रास होतो | अजय जोशी | 12 | |
| कश्या कश्याला मुकलो ते... | अविनाशकुलकर्णी | 6 |