कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| इतकेच मला जाताना... | चिन्मय खंडागळे | 4 | |
| भरारी | अज्ञातकुल | 5 | |
| मिपाकरलक्षणे समास द्वितीय | सस्नेह | 50 | |
| मटका भरके सूरज उल्टा | चाणक्य | 14 | |
| हॅपी न्यू यर रे बाबांनो... | वेल्लाभट | 1 | |
| २०१४ चा आशावादी आढावा !! | निमिष सोनार | 8 | |
| कारण जीवन हे लोणचं आहे... | भिकापाटील | 13 | |
| एक चारोळी ... ! | psajid | 0 | |
| झिंगूनी गुत्त्यात सार्या... | धन्या | 27 | |
| बलिदान त्याविना हे ... (गझल) | अमेय६३७७ | 4 | |
| बाप माणुस | jaypal | 7 | |
| अंथर | अज्ञातकुल | 1 | |
| बिंब आणि प्रतिबिंब | शेखरमोघे | 0 | |
| टिकले तुफान काही | गंगाधर मुटे | 12 | |
| तेंव्हा | psajid | 4 | |
| अनुप्रीती | अज्ञातकुल | 4 | |
| का रे बा विठ्ठ्ला का न भेटी मला? | पाषाणभेद | 8 | |
| अशाच एका सांज वेळी | पंडित मयुरेश नागेश्वरम देशपांडे | 3 | |
| मिपाकरलक्षणे | सस्नेह | 73 | |
| तू रे पल्याड गोविंदा! | आतिवास | 23 |