कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| थोडं थोडं जगून घे | वैभवकुमारन | 3 | |
| झुळुक वादळी | अज्ञातकुल | 3 | |
| कवडसे | उपटसुंभ | 5 | |
| दिवस आठवले आपल्या जुन्या मैफिलीचे..... | पंडित मयुरेश नागेश्वरम देशपांडे | 6 | |
| आयुष्य | हेमान्गी | 2 | |
| चिर अनंत | अज्ञातकुल | 0 | |
| लेखकु | मंदार दिलीप जोशी | 5 | |
| पुढच्यासाठी | अमेय६३७७ | 37 | |
| धुसरिका - व्युत्क्रम | जातवेद | 75 | |
| नाही चाखली चव 'लाडू'ची- (विडंबन) | विदेश | 8 | |
| आलेख | अज्ञातकुल | 3 | |
| ~झालंया सगळ येगळ~ | वैभवकुमारन | 0 | |
| बसा की एकदा खुर्ची वरती | विवेकपटाईत | 2 | |
| झुक्या तुझ्या फेसबुकला | विनय_६६७ | 4 | |
| फुकुशिमानो तोत्तोचान | नगरीनिरंजन | 3 | |
| दॅट्स व्हाय इंडिया महान है : नागपुरी तडका | गंगाधर मुटे | 12 | |
| प्रौढखणी | अज्ञातकुल | 1 | |
| दिवा आणि ती | अमेय६३७७ | 14 | |
| गूढ भाषा नयनांच्या !! | बाळअमोघ | 0 | |
| कविता : घरची मैफल !! | बाळअमोघ | 2 |