कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| हायकू - | विदेश | 2 | |
| अवनी | अज्ञातकुल | 1 | |
| पंढरीचा राया : अभंग | गंगाधर मुटे | 6 | |
| " धन्य आज दर्शनाने तुझ्या -" | विदेश | 0 | |
| १ प्रश्न | वैभव कुलकर्नि | 4 | |
| ~देवा आता हार मान तू~ | वैभव कुलकर्नि | 2 | |
| झालंया सगळ येगळ आता .. | वैभव कुलकर्नि | 4 | |
| " हे असे चालायचेच!! " | निनाव | 2 | |
| "गूढ" (बेडसे लेणी-एक गूढानुभव!) | अत्रुप्त आत्मा | 45 | |
| मांजर, हत्ती, कुत्रा कि चिमणी? | निनाव | 1 | |
| कधीतरी | वेल्लाभट | 6 | |
| कृष्ण तो आतला ... | आतिवास | 29 | |
| शब्द शब्द | अज्ञातकुल | 4 | |
| सासर-पण-माहेर | Bhagwanta Wayal | 4 | |
| एक सूफी गीत ... | मूकवाचक | 6 | |
| पाऊस | पद्मश्री चित्रे | 15 | |
| राते- हिंदी रचना आणि भावानुवाद | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 10 | |
| आकाश | drsunilahirrao | 2 | |
| ग बाई तुन्ह नाव शे सुपडाबाई | पाषाणभेद | 16 | |
| चारोळी | राजा सोव्नी | 2 |