कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| वाटते मजला भिती - (गझल) | विदेश | 3 | |
| काही अठवणी...! | अत्रुप्त आत्मा | 20 | |
| एक प्रेमपत्र लिहले होते | वैभव कुलकर्नि | 0 | |
| बाकी काही नाही.............. माझी ८वन काढतंय कुणीतरी | वैभव कुलकर्नि | 0 | |
| रेषा आणि लढाया | प्रसाद साळवी | 2 | |
| रात्रीस उखाणा सुचला | प्रसाद साळवी | 6 | |
| तान्हुला | Bhagwanta Wayal | 10 | |
| " चिऊ चिऊ चिडकी - " (बालगीत) | विदेश | 1 | |
| " आरती कंत्राटदाराची - " | विदेश | 1 | |
| स्वतःशी मी कधीतरी आडमुठा वागतो | वैभव कुलकर्नि | 2 | |
| ऐक स्त्री जन्मा तुझी कहाणी.. | टक्कू | 3 | |
| अनेक ज्योती पेटवणारी, एक पणती मालवली होती | सार्थबोध | 0 | |
| विरंगुळा | अज्ञातकुल | 6 | |
| मोठीशी आरोळी | वैभव कुलकर्नि | 2 | |
| बाप.....उर्फ़ वडिल ....!!!!! | DTPS | 3 | |
| पर्णोपर्णी | सार्थबोध | 0 | |
| समर्पण | सार्थबोध | 4 | |
| ' ठोकळे ' | drsunilahirrao | 0 | |
| चीन विश्वासपात्र नाही | गंगाधर मुटे | 18 | |
| नार्सिससचा स्वप्नदोष | नगरीनिरंजन | 8 |