कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| असणे नसणे | अज्ञातकुल | 13 | |
| शोध माझ्यातला | पाषाणभेद | 8 | |
| प्रवासी | सार्थबोध | 1 | |
| डासाचे मनोगत | भ ट क्या खे ड वा ला | 4 | |
| संस्कृती | सार्थबोध | 0 | |
| मला झोप हवी | वैभव कुलकर्नि | 1 | |
| रानपाखरं... | psajid | 1 | |
| ती... | सार्थबोध | 1 | |
| अबोल प्रीत बोलली... | K Sangeeta | 14 | |
| फितुरी ( त्या सावळ्या तनुचे वर आधारीत ) | स्वाती३५११ | 2 | |
| न्याय | स्वाती३५११ | 2 | |
| क्षण | स्वाती३५११ | 6 | |
| अथांग | अज्ञातकुल | 0 | |
| आहे!? | पाषाणभेद | 10 | |
| आजहि | अज्ञातकुल | 0 | |
| स्वकीय ? | psajid | 0 | |
| किमया | अज्ञातकुल | 0 | |
| विषय | Bhagwanta Wayal | 0 | |
| येथे तिरंगा विकला जातो'.......... | जमीर इब्राहीम 'आझाद' | 34 | |
| लोकशाहीचा अभंग | गंगाधर मुटे | 65 |