कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| अजून आहे मी वनवासी | आनंदमयी | 9 | |
| प्रसाद शेरणीचा | BONGALE SANTOSH SHAHU | 2 | |
| पुन्हा नव्याने.. | आनंदमयी | 17 | |
| अर्थ | माम्लेदारचा पन्खा | 8 | |
| सल अंतरीचा.. | फुंटी | 6 | |
| शब्द चिमुकले सांडत होते ... | जेनी... | 32 | |
| वानोळा | अज्ञातकुल | 6 | |
| रेडा कायें (म्हणोन) लपविता... ??? | बॅटमॅन | 53 | |
| तुझिया डोळ्यांत तेंव्हा पाऊस दाटला होता … | घन निल | 11 | |
| ( चला नांगरूया शेत सारे ) | मोदक | 39 | |
| (चल परत नव्याने सुरू करू सारे) | धन्या | 71 | |
| रागावणे – समजावणे | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 31 | |
| फोल | आतिवास | 23 | |
| गुंता | सार्थबोध | 0 | |
| चल परत नव्याने सुरू करू सारे | पल्लवी मिंड | 13 | |
| चारोळ्या - २ | धन्या | 17 | |
| पुरावा | सार्थबोध | 2 | |
| तिन कविता तिन ठिगळे | ज्ञानोबाचे पैजार | 14 | |
| गुन्हा | चाणक्य | 13 | |
| लागले वेड मज | | प्रमोद देर्देकर | 2 |