कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मिसळपाव | सार्थबोध | 6 | |
| अविचल | अज्ञातकुल | 4 | |
| आज पुन्हा उडावेसे वाटले | पल्लवी मिंड | 11 | |
| अभय | सार्थबोध | 9 | |
| शिळी जिलेबी - १ | धन्या | 30 | |
| दोष | सार्थबोध | 3 | |
| व्यथा | psajid | 0 | |
| नासाचे अभंग | रमताराम | 13 | |
| (गेम) | धन्या | 16 | |
| निळारंभ | सार्थबोध | 8 | |
| ' अधांतरी ..' | drsunilahirrao | 0 | |
| असले कसले जेवण केले | पाषाणभेद | 4 | |
| देव नावे भिक्षा चालुच राही.... | निश | 2 | |
| अशीच आजची रात्र | फुंटी | 21 | |
| ओढ दर्शनाची | विदेश | 1 | |
| नवथर | अज्ञातकुल | 0 | |
| बोल बैला बोल : नागपुरी तडका | गंगाधर मुटे | 7 | |
| २०१४ | सांजसंध्या | 7 | |
| झुक्या चे अभंग | अविनाशकुलकर्णी | 3 | |
| शिवबाचि तलवार | kalpana joshi | 15 |