कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मी मिपाकर कसा? | प्रशांत उदय मनोहर | 3 | |
| हागणदारीमुक्त गाव | फ्रॅक्चर बंड्या | 7 | |
| येडु..... | विजुभाऊ | 7 | |
| मी एन आर आय कसा? | बहुगुणी | 14 | |
| कधी एके काळी.. | ज्ञानेश... | 2 | |
| अनुवाद | लक्ष्मणसुत | 1 | |
| रिमझिम येता वळवाची सर--- | पुष्कराज | 4 | |
| प्रासंगिक | नरेंद्र गोळे | 4 | |
| वाचले जाते विडंबन, मान ते स्थळ आपुले | केशवसुमार | 22 | |
| बोलली जाते मराठी, मान ते घर आपुले | धोंडोपंत | 22 | |
| समर्पण | क्रान्ति | 12 | |
| (वाटेवर मी तुझ्या लावले--) | विजुभाऊ | 6 | |
| (चेप राजसा..) | चतुरंग | 14 | |
| मज वाटे .... | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| थांब राजसा.. | प्राजु | 17 | |
| ह्याचा देव | ऋषिकेश | 25 | |
| वाटेवर मी तिच्या ठेवली-- | पुष्कराज | 14 | |
| उंबरठा.. | प्राजु | 18 | |
| झूम | अरुण मनोहर | 3 | |
| पाहिजे एकांत थोडा-- | पुष्कराज | 6 |