कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| विझलेला विद्वंश | विजुभाऊ | 8 | |
| परिणिता.. | प्राजु | 21 | |
| पुन्हा | क्रान्ति | 18 | |
| || गीत अभिमानाचे स्फुरु दे || | मनीषा | 12 | |
| दिवाळीची पहाट | फ्रॅक्चर बंड्या | 8 | |
| कविता लिहिताना! | गोगट्यांचा समीर | 8 | |
| जन उडाण संपाचे | कौतुक शिरोडकर | 4 | |
| काहीच्या काही... | विमुक्त | 3 | |
| डंकर्कचे विद्धविवेचन | शरदिनी | 53 | |
| (थांब ना ...) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 12 | |
| (थांब ना..) | चेतन | 0 | |
| बेधडक जगायचय | फ्रॅक्चर बंड्या | 4 | |
| तेच तेच परत परत | गोगट्यांचा समीर | 2 | |
| थांब ना.. | प्राजु | 13 | |
| (डांबिस पिवळा) | पिवळा डांबिस | 30 | |
| 'नांदा सौख्यभरे' (राखी तू मांडले। तुझे स्वयंवर) | अविनाश ओगले | 5 | |
| हिंदोळा | शरदिनी | 37 | |
| आधुनिक रामायण .... | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| मल्हारसांज | कौतुक शिरोडकर | 7 | |
| तिने केली एक कविता | दत्ता काळे | 19 |