कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मन | पद्मश्री चित्रे | 14 | |
| ते माझे घर | नरेंद्र गोळे | 9 | |
| बाप्पा , असे ही... | हृषीकेश पतकी | 14 | |
| भेटी | क्रान्ति | 6 | |
| ..मोक्ष.. | कानडाऊ योगेशु | 9 | |
| मन काहूर... | प्राजु | 25 | |
| र्निमाल्यातिल दोन फुले-- | पुष्कराज | 11 | |
| (( ती - सहा ओळीत )) | दशानन | 8 | |
| प्रेम - चार ओळीत | पुष्कराज | 11 | |
| गणेश माझा........ | अनिरुद्धशेटे | 1 | |
| चांदण्यातले जेवण | नाना बेरके | 3 | |
| (सारे कसे सुने सुने वाटते) | दशानन | 20 | |
| गणपती बाप्पा मोरया ! (भक्तिरस) | विशाल कुलकर्णी | 5 | |
| सारे कसे नवे नवे वाटते | पाषाणभेद | 1 | |
| ये र बालां | ब्रिटिश | 36 | |
| पुन्हा एकदा... | हृषीकेश पतकी | 11 | |
| गणेशवंदना | क्रान्ति | 7 | |
| पसाभरं | शैलेन्द्र | 13 | |
| (ऐन दुपारी!) | चतुरंग | 19 | |
| कलमी झाड | फ्रॅक्चर बंड्या | 1 |