कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| अलिप्त | अजिंक्य | 9 | |
| मिशीचा पिळ | फ्रॅक्चर बंड्या | 5 | |
| अजब कहाणी आहे ही | नरेंद्र गोळे | 4 | |
| मी | अजिंक्य | 11 | |
| भय तिचे संपलेच नाही | अरुण मनोहर | 6 | |
| रोंरावत आला वारा | पुष्कराज | 11 | |
| मंजूर नाही | क्रान्ति | 37 | |
| शब्दसंभ्रम... | हृषीकेश पतकी | 10 | |
| चारोळ्या... | अशोक गोडबोले | 10 | |
| थोडीशी फुल,थोडेसे मोती | पुष्कराज | 14 | |
| माझेच ग्रह तारे | फ्रॅक्चर बंड्या | 17 | |
| पुन्हा पावसाला.. | अनिरुध्द | 0 | |
| करायचं ते करून टाक | गोगट्यांचा समीर | 4 | |
| आणि पाय माझा घसरतो ! | विशाल कुलकर्णी | 12 | |
| मर्यादा | अरुण मनोहर | 8 | |
| आणि त्यावर म्हणा.. | शाहरुख | 23 | |
| (सर्व काही आत आहे) | राघव | 14 | |
| सर्व काही आत आहे | अजिंक्य | 3 | |
| 'नव'कविता | ऋषिकेश | 21 | |
| समिधा | क्रान्ति | 10 |