कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| माकडा माकडा हुप | पाषाणभेद | 3 | |
| (टुर्र) | लंबूटांग | 9 | |
| जीवन गेले सरून सरून जाईल ही रात्र | श्रीकृष्ण सामंत | 14 | |
| परागंदा | मिसळभोक्ता | 33 | |
| काहीतरी राहिले आहे इथे | धनंजय | 34 | |
| फक्त तुझ्यासाठी ...(यावेळी कविता) | प्रभो | 20 | |
| अताशा असे हे मला काय होते | उपटसुंभ | 7 | |
| हास आयुष्या | क्रान्ति | 8 | |
| अंगुठे | नरेंद्र गोळे | 6 | |
| मुजरा | फ्रॅक्चर बंड्या | 3 | |
| माहित नाही | मिसळभोक्ता | 14 | |
| माझा प्रियतम | मिसळभोक्ता | 28 | |
| एक आकाश माझही | अनुप्रिया | 5 | |
| आसमंत भिजले कसे पेटले हे रान | श्रीकृष्ण सामंत | 9 | |
| ती ... | मनीषा | 15 | |
| रान | क्रान्ति | 10 | |
| फक्त तूझ्यासाठी | प्रभो | 19 | |
| कवी | फ्रॅक्चर बंड्या | 6 | |
| व्यथा | कानडाऊ योगेशु | 8 | |
| गणित | विशाल कुलकर्णी | 4 |