कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गणित!-२ | केशवसुमार | 4 | |
| [वळीत] | अमृतांजन | 1 | |
| झणझणीत | टारझन | 13 | |
| [गणित!] | केशवसुमार | 14 | |
| (झिरो) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 9 | |
| <अगणीत> | विजुभाऊ | 8 | |
| ((गणित)) | चतुरंग | 12 | |
| दहाजणीत! | सन्जोप राव | 41 | |
| गणित! | श्रावण मोडक | 10 | |
| आयटीवर बोलू काही..! | उपटसुंभ | 3 | |
| (फराळ) | कौतुक शिरोडकर | 11 | |
| स्वप्न | पाषाणभेद | 7 | |
| (चॅनेल खूप आले, आता बघेन म्हणतो) | अमृतांजन | 9 | |
| निरोप | कौतुक शिरोडकर | 6 | |
| 'खोका' वदून गेल्या, आता नडेन म्हणतो | llपुण्याचे पेशवेll | 13 | |
| (पाहून खुप झाले, आता खाईन म्हणतो) | चेतन | 7 | |
| आता काही लिहीन म्हणतो. | बाबुराव | 7 | |
| (सुज रंग) | अमृतांजन | 10 | |
| 'काका' वदून गेल्या, आता बघेन म्हणतो | चतुरंग | 48 | |
| 'गिरी' वाद | कौतुक शिरोडकर | 0 |