कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| २६/११/२००९ | ऋषिकेश | 18 | |
| (मी आणि (लेखांचा) पाऊस!) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 23 | |
| मी आणी पाउस | प्रभो | 21 | |
| बोलताना का सुचेना.. | प्राजु | 14 | |
| स्वप्न आणि सत्य ! | विशाल कुलकर्णी | 12 | |
| दयाघना गणराया दे चरणी आसरा | मितालि | 0 | |
| [मित्र] | अमृतांजन | 0 | |
| चित्र | sneharani | 9 | |
| [घोडा] | अमृतांजन | 3 | |
| शनिवारचा उतारा: ((संभवित) तह) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 18 | |
| इलिनॉईच्या दुगाण्या | शरदिनी | 34 | |
| कोडी-२ | केशवसुमार | 18 | |
| (कोडी) | चेतन | 3 | |
| मला इन्फेक्शन होऊ नये म्हणून | पुष्कर | 7 | |
| <खड्ड्या तुझ्या मिठीत रे....... > | विजुभाऊ | 4 | |
| कोडी | क्रान्ति | 13 | |
| सखये तुझ्या मिठीत..... | उदय सप्रे | 5 | |
| ---------प्रश्न -------- | अनुप्रिया | 10 | |
| [फसवे जग] | अमृतांजन | 0 | |
| [प्यावेसे वाटते] | अमृतांजन | 46 |