कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ते झाड़ तोडले कोणी ? | सागरलहरी | 3 | |
| कान्हा तुझ्या मुरलीचा, साज असा छळतो रे, | सागरलहरी | 3 | |
| फूल ते माझे न होते.... | सागरलहरी | 0 | |
| काळ......... | चन्द्रशेखर गोखले | 3 | |
| <शेवट> | ऋषिकेश | 0 | |
| वेडा | फ्रॅक्चर बंड्या | 2 | |
| (ते जीवच वेडे होते) | चेतन | 0 | |
| त्यात काय मोठंसं...? | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| ते जीवच वेडे होते | क्रान्ति | 19 | |
| (शेवट) | केशवसुमार | 17 | |
| शेवट | बेसनलाडू | 17 | |
| एक मुक्तक. | रामदास | 21 | |
| (अवांतर) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 22 | |
| मत्सर ... | विशाल कुलकर्णी | 10 | |
| बुधवारची कविता: (टारोबा तुज शहीद केले) | llपुण्याचे पेशवेll | 31 | |
| कविते, तुज शोधित आले | क्रान्ति | 30 | |
| खंत..... | उदय सप्रे | 2 | |
| <पुन्हा ती भेटली तेव्हा.> | विजुभाऊ | 9 | |
| पुन्हा ती भेटली तेव्हा.. | ज्ञानेश... | 4 | |
| [गणिती सुत्रे] | अमृतांजन | 0 |