कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| रान वाट | सागरलहरी | 0 | |
| करतो अजून आशा.... | सागरलहरी | 0 | |
| परी | सागरलहरी | 1 | |
| अश्वत्थ | सागरलहरी | 1 | |
| पूर्वीगत पण आता कोणी हिणवत नाही | चेतन | 0 | |
| व्यथा | विनायक प्रभू | 7 | |
| काही कविता. | रामदास | 11 | |
| पूर्वीगत पण आता काही करवत नाही | केशवसुमार | 7 | |
| पूर्वीगत पण आता काही लिहिवत नाही | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 10 | |
| संकल्पः नव्या युगाचा | नरेंद्र गोळे | 3 | |
| मंडली, म्या एक दादांसारकी कविता ल्यिहल्येली हाय. वाचा तर मंग आता. | पाषाणभेद | 5 | |
| उषा.. | प्राजु | 14 | |
| व्यसन...! | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| गोरी गोरी पान (विडंबन) | JAGOMOHANPYARE | 4 | |
| "निरोप नवव्या वर्षाचा, स्वागत नव्या वर्षाचे..." | निमिष सोनार | 1 | |
| मिसळपाव करता करता | JAGOMOHANPYARE | 9 | |
| बंदोबस्त-२ | केशवसुमार | 9 | |
| गीत रामायण- बाबुजी आणि गदिमांचे | पुष्कराज | 3 | |
| बंदोबस्त | विनायक प्रभू | 16 | |
| मागणे | पद्मश्री चित्रे | 10 |