कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| असे सखे तू रुसू नको ना..... | सागरलहरी | 7 | |
| कोडगं सूख..... | उदय सप्रे | 11 | |
| तत्वज्ञान..... | उदय सप्रे | 1 | |
| या गूढ सावल्यांनी.. | प्राजु | 17 | |
| व्हर्च्युअल रिअॅलिटी | श्रावण मोडक | 14 | |
| (कुठे भास होतो मला 'कोंकणाचा') | चतुरंग | 22 | |
| हे चित्र पहा आणि ते चित्र पहा" | अविनाशकुलकर्णी | 2 | |
| वाट चुकवेल वाट | क्रान्ति | 3 | |
| ((त्यांच्या लग्नाची पत्रिका आज घरी आली)) | Nile | 6 | |
| नववधु | अनिरुद्धशेटे | 3 | |
| फर्निचर | अरुण मनोहर | 16 | |
| हवे कुणाला...! | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| थरथरत्या ज्योतीला अंधाराचा भार | सागरलहरी | 0 | |
| [उन घे] | अमृतांजन | 3 | |
| क- कवितेचा | बाबुराव | 3 | |
| (छंद दे) | चतुरंग | 17 | |
| आक्रोश...! | विशाल कुलकर्णी | 6 | |
| सोनपावले ही तुझी... | अंकुश चव्हाण | 3 | |
| <strong>खेळ मांडला.....</strong> | उदय सप्रे | 0 | |
| गवगवा..... | उदय सप्रे | 0 |