कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मन भरून येते पण आभाळ काही भरत नाही | सागरलहरी | 2 | |
| कशाला ? | सागरलहरी | 2 | |
| येई येई गा मुकुंदा | जगज्जीवन परमानंदा | | सागरलहरी | 0 | |
| खरेसाहेब ......., माफ करा ! | विशाल कुलकर्णी | 10 | |
| सांता क्लॉज | अविनाशकुलकर्णी | 9 | |
| बुधवारची कविता: (मुद्दाम काढलेले) | llपुण्याचे पेशवेll | 60 | |
| (आवाहन) अर्थात कसं काय एडीटर बरं हाय का? | केसुरंगा | 13 | |
| नव्या दशकाचे बडबडगीत. | विजुभाऊ | 25 | |
| (घाईची वेळ) | शाहरुख | 8 | |
| (पंक्चरची वेळ) | llपुण्याचे पेशवेll | 18 | |
| (विडंबनी खेळ..) | चतुरंग | 16 | |
| अनंताचा खेळ.. | प्राजु | 20 | |
| एकाकी वाट | अरुण मनोहर | 10 | |
| शनिवारचा उतारा - (कृष्ण-ए-कमळ) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 33 | |
| अगा देवराया | अम्हा खेव द्याया | | सागरलहरी | 3 | |
| हरी हे दयाळा कधी भेट देशी | सागरलहरी | 3 | |
| रिती पोकळी | क्रान्ति | 13 | |
| (पुरावा) | चतुरंग | 8 | |
| बुधवारची कविता: (वाढदिवस - ३) | llपुण्याचे पेशवेll | 19 | |
| (काढदिवस) | टारझन | 8 |