कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| उमेद | विजुभाऊ | 0 | |
| राणी वै-याची रात्र आहे | शरद जयकर | 0 | |
| धोका | क्रान्ति | 13 | |
| <परा> | विजुभाऊ | 5 | |
| कधी कधी | फ्रॅक्चर बंड्या | 6 | |
| म्हणून..... | उदय सप्रे | 4 | |
| माझेच होते..... | उदय सप्रे | 10 | |
| अंगाई | क्रान्ति | 6 | |
| आठवण...(२) | प्रभो | 5 | |
| कारे प्रिया दूर जाशी, | सागरलहरी | 0 | |
| आज अचानक... | नीलांबरी | 6 | |
| मनात माझ्या... | अजिंक्य | 7 | |
| (लिहावे कुठे) | चेतन | 0 | |
| रुतावे कुठे | जयवी | 13 | |
| माझी अगतीकता | पाषाणभेद | 4 | |
| काकमित्रा | सागरलहरी | 2 | |
| प्रित माझी कळेना.. | अविनाशकुलकर्णी | 1 | |
| प्रहरांचे दु:ख..... | उदय सप्रे | 2 | |
| अगतिक..... | उदय सप्रे | 7 | |
| (कोडगं सुख.....) | ज्ञानोबाचे पैजार | 0 |