कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| "मिड-लाइफ क्रायसिस" अर्थात एका लेखकाचे 'मनोगत' | केशवसुमार | 27 | |
| काय करावे कळेना | पाषाणभेद | 1 | |
| तुझ्या मिठीच्या धुंद सरी.. | प्राजु | 17 | |
| तुझे माझे गुलाबाचे | पुष्कराज | 1 | |
| जगताना... | जयेश माधव | 3 | |
| गुलाबाचा सण होता | पुष्कराज | 8 | |
| प्रेमदिन | जयवी | 7 | |
| कडकलक्ष्मी | क्रान्ति | 6 | |
| शिव-वडा | पॅपिलॉन | 3 | |
| काही जुनी टिपणे. | रामदास | 22 | |
| हसली रे हसली... | Navigator | 4 | |
| देणे | क्रान्ति | 9 | |
| (नको आणखी ) | अमोल केळकर | 6 | |
| बाबरीचे श्राद्ध | शरद जयकर | 10 | |
| हवी..... | उदय सप्रे | 3 | |
| नको आणखी | जयवी | 11 | |
| (बोका) | शाहरुख | 12 | |
| (कविते, हे तर तुझेच देणे..!) | चतुरंग | 15 | |
| कविते, हे तर तुझेच देणे..! | प्राजु | 13 | |
| (धोका) | चतुरंग | 9 |