कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| छंद दे.. | प्राजु | 22 | |
| विडंबक | चतुरंग | 13 | |
| चालू करा तुमचे इंजन | पाषाणभेद | 5 | |
| वेल | सागरलहरी | 0 | |
| भूताच्या भूतकाळाचे गूढ प्रेम...!!! | निमिष सोनार | 1 | |
| मला पुन्हा एकदा | विश्वेश | 2 | |
| तू तेव्हा तशी ... | विश्वेश | 0 | |
| बेत | विश्वेश | 0 | |
| इज्जत! | दिनेश५७ | 5 | |
| प्रेमाचा "निसर्ग" | निमिष सोनार | 0 | |
| लीला केली विश्वंभरे .... | सागरलहरी | 2 | |
| उत्सव ...! | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| ओझी | क्रान्ति | 9 | |
| खरेसाहेब…माफ़ करा : ३ : दिवस असे की … | विशाल कुलकर्णी | 6 | |
| आठवण | प्रभो | 1 | |
| 'खरेसाहेब माफ करा : २ : एवढंच ना? | विशाल कुलकर्णी | 12 | |
| ती -२ | केशवसुमार | 14 | |
| (ती) | चतुरंग | 9 | |
| ती | क्रान्ति | 18 | |
| प्रेम काव्य संग्रह | निमिष सोनार | 7 |