कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| खरडवाद... | केशवसुमार | 5 | |
| आशावाद... | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 1 | |
| मला मेघदुताचा पुढील दुवा हवा आहे.....विदग्ध वरील . | डावखुरा | 6 | |
| अबे राडे राजा | विजुभाऊ | 6 | |
| काही बाही | दीप्या | 1 | |
| आभारी वेदनांचा ! | विशाल कुलकर्णी | 8 | |
| आमच्या सम आम्हीच ! ! ! | निरन्जन वहालेकर | 4 | |
| खेळ दोन ओळींचा - ५ | राघव | 18 | |
| समर्थ | क्रान्ति | 19 | |
| त्यानंतर सगेळ्च थांबले आहे ... | सुवर्णमयी | 15 | |
| काठावरती तुम्ही उभे (बैठकीची लावणी) | पाषाणभेद | 5 | |
| ~ गुढीपाडवा ~ | निमिष सोनार | 2 | |
| टारझण मला खास वाटत नाहीत | बाबुराव | 20 | |
| (आज अचानक गाठ पडे) | चतुरंग | 38 | |
| एक टुमदार गाव - माझे माधवनगर - भाग - २. | शशिकांत ओक | 7 | |
| नाडि वाचुनी अति मी दमले, थकले रे शशिकांता! | राजेश घासकडवी | 54 | |
| )तुझ्या रेशमी केसांनी( | sur_nair | 0 | |
| ))तुझ्या रेशमी केसांनी(( | तुका म्हणे | 0 | |
| )तुझ्या रेशमी केसांनी( | राजेश घासकडवी | 2 | |
| तुझ्या रेशमी केसांनी | विजुभाऊ | 4 |