कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ठेव | क्रान्ति | 5 | |
| दे दे भाकर | कानडाऊ योगेशु | 3 | |
| ऐक धरित्रे!! | प्राजु | 19 | |
| गुलमोहोर असा | नेहमी आनंदी | 3 | |
| जय जवान जय किसान ! | चन्द्रशेखर गोखले | 5 | |
| (वार्धक्य) | चेतन | 2 | |
| सागरतिरी उसळती लाटा | पाषाणभेद | 0 | |
| (माझाच माज) | llपुण्याचे पेशवेll | 18 | |
| २६/११ : एक पाशवी आगळीक | गिरीश कुळकर्णी | 0 | |
| (हिरवा माज) | चतुरंग | 17 | |
| (माजुर्डा डास) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 23 | |
| वार्धक्य | गिरीश कुळकर्णी | 7 | |
| (पिवळा बाज) | चेतन | 16 | |
| हिरवा साज | जयवी | 13 | |
| [कसाही का असेना] | अमृतांजन | 13 | |
| (२६/११/२००९) | चेतन | 9 | |
| <नंदनला पत्रे> | पिवळा डांबिस | 33 | |
| आमचा रंग देऊन पाहा | गिरीश कुळकर्णी | 6 | |
| बुधवारची कविता: (प्रतिसाद का टिकेना) | llपुण्याचे पेशवेll | 24 | |
| अहो पाहुणे हळुहळू होवू द्या, घाई करू नका, असं लाजू नका | पाषाणभेद | 8 |