कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| नवे जग | फ्रॅक्चर बंड्या | 1 | |
| नवीन वसाहत | अरुण मनोहर | 0 | |
| घेतली उडी अशी वेडी (वीर तात्याराव सावरकरांचा पोवाडा) | अरुण मनोहर | 21 | |
| शनिवारचा उतारा - खात्री | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 8 | |
| पाठवणी... | नेहमी आनंदी | 9 | |
| नकोसे वाटते | क्रान्ति | 21 | |
| यांच असं का होतं ते कळतं नाही ... विचारवंताना समर्पित ! | छोटा डॉन | 35 | |
| ते मीठ खारे नव्हते | अरुण मनोहर | 36 | |
| आचार्य नाडीनंदाचा माडीबोध - | शशिकांत ओक | 3 | |
| ऑनलाइन प्रेम | फ्रॅक्चर बंड्या | 16 | |
| हिशोब | विजुभाऊ | 4 | |
| बुधवारची कविता: तमाशा | llपुण्याचे पेशवेll | 20 | |
| अबू आझमीची लावणी..! | उपटसुंभ | 29 | |
| असंबध्ध | अविनाशकुलकर्णी | 8 | |
| ३२० जी बी पोर्टेबल यु.एस.बी हार्ड ड्राइव्ह | अविनाशकुलकर्णी | 10 | |
| शनिवारचं उत्तर: प्रतिसाद | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 17 | |
| (पोटातला कावळा) | पिवळा डांबिस | 17 | |
| पैलतिरी.. | प्राजु | 9 | |
| (तळतळ) | llपुण्याचे पेशवेll | 16 | |
| मृगजळ | प्रभो | 11 |