कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| माझ्या नकळत | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| वृद्धाश्रम | तृप्ति २३ | 4 | |
| डिजीटल डिजीटल | शिव कन्या | 10 | |
| शुभ्र सारे जीवघेणे | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| चंद्राचे मनोगत | कलम | 7 | |
| भारलेल्या त्या क्षणांचे... | अनन्त्_यात्री | 6 | |
| तुझे नाव | कहर | 2 | |
| सावरी... | प्राची अश्विनी | 5 | |
| ही हाक कुणाची आहे...! | फिझा | 9 | |
| पाकोळी | चांदणे संदीप | 11 | |
| शब्दांच्या घनगर्द सावलीत | अनन्त्_यात्री | 7 | |
| मी कळीला फुले वेचताना पाहिले | आकाश५०८९ | 0 | |
| तो बोलला खरे | आकाश५०८९ | 0 | |
| थांबला नसतास तू | आकाश५०८९ | 4 | |
| पूर | कहर | 4 | |
| सारंगिया | मनमेघ | 7 | |
| कोणीतरी असावे....... | फिझा | 0 | |
| द्वादशैतानि नामानि | अनन्त्_यात्री | 8 | |
| मन यॉडलं यॉडलं! (यॉडलिंगवर गझल) | कुमार जावडेकर | 4 | |
| तांब्याश्री | चामुंडराय | 9 |