कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| केस विस्कटलेले, ओघळले काजळ गाली | अविनाशकुलकर्णी | 15 | |
| शब्द गोठून गेले अर्थाविन ............ | एकप्रवासी | 3 | |
| अरसिक? | डॉ. एस. पी. दोरुगडे | 7 | |
| कार्यकर्ता | आनंद कांबीकर | 6 | |
| भयंकररस:२ | डॉ. एस. पी. दोरुगडे | 1 | |
| भयंकररस:१ | डॉ. एस. पी. दोरुगडे | 3 | |
| कवितेवर केलेली कविता | निलम बुचडे | 34 | |
| माझ्या मराठीचा बोल | वेल्लाभट | 13 | |
| तुझ्याशिवाय... | निलम बुचडे | 7 | |
| तिची कविता | निलम बुचडे | 4 | |
| काल दुपारी.... | जव्हेरगंज | 2 | |
| हाक | मंदार दिलीप जोशी | 12 | |
| होळी आणि गटारी (विडंबन) | दमामि | 20 | |
| कौतुक | विशाल कुलकर्णी | 18 | |
| करवाचौथ आणी संकष्टी चतुर्थी | महासंग्राम | 3 | |
| लाजाळू नि गुलाब | चांदणे संदीप | 6 | |
| "माझ्या सोलापुरी मातीत..." | विशाल कुलकर्णी | 25 | |
| फुल सांगे काट्याला ……… | एकप्रवासी | 1 | |
| एक माणूस मिशी काढून.............. | शिव कन्या | 71 | |
| ।। बरे झाले स्वातंत्र्य मिळाले ।। | सचिन जाधव | 11 |