कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| बहकलेले दिवस | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 18 | |
| आसमंतात तारे सर्व निळेच , नाहि का? | निनाव | 2 | |
| रस्त्यानं रेतीवाला तो आला | पाषाणभेद | 2 | |
| पिंक जिव्हारी गर्दुल्ल्याचे नकादु चेण्यापका सके | शरदिनी | 40 | |
| <पेयनिष्ठ पेताडाचा कर्मदरिद्री बाटलीभंग> | लंबूटांग | 22 | |
| व्हायब्रेटर रिंगटोन पाठवाना | पाषाणभेद | 13 | |
| जा हसत दूर जा | गणेशा | 7 | |
| एक त्रागा सुनेचा | विदेश | 2 | |
| मोज्-माप किती... | निनाव | 2 | |
| तुझ्या सावलीस लपता लपता | निनाव | 0 | |
| (एका तळ्यात होती) | मूकवाचक | 31 | |
| नववर्षाचा सण हा पहिला आनंदाने साजरा करू | पाषाणभेद | 2 | |
| पुन्हा रात्र (२) | निनाव | 1 | |
| आश्वस्त | सोनल कर्णिक वायकुळ | 2 | |
| ( पेटवी लंका हनुमंत ) | अर्धवट | 29 | |
| दाणे पडले टप टप टप | विदेश | 8 | |
| पाखरे निघालीत देशांतराला ...!! | प्रकाश१११ | 3 | |
| काफिला ... | sagarparadkar | 0 | |
| विझले आज दिवे सारे | निनाव | 4 | |
| शोध माझा | निनाव | 1 |