कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गझल | क्रान्ति | 18 | |
| भिऊ नकोस ... | नगरीनिरंजन | 8 | |
| बेदखल | सोनल कर्णिक वायकुळ | 4 | |
| भिऊ नकोस ... | विश्वेश | 5 | |
| मी आहे एक सामना | मुक्तसुनीत | 34 | |
| प्रतिबिंब | मूकवाचक | 4 | |
| झेन काव्य | मूकवाचक | 12 | |
| साखळीतल्या कुत्र्यावर - | विदेश | 1 | |
| मज्जा आहे बुआ .... | विश्वेश | 3 | |
| कधी सरणार ही सांज | निनाव | 3 | |
| श्वास श्वासात... | गणेशा | 14 | |
| समाजाच प्रतिबिंब | स्वर भायदे | 2 | |
| आयुष्य साधेपणे जगत गेला ...!! | प्रकाश१११ | 8 | |
| भाकीत | दीपा माने | 6 | |
| फुलपाखरू माझ्या मनीचे.... | हर्षद प्रभुदेसाई | 5 | |
| शत्रु समोरून थेट वार करुन गेला - | विदेश | 6 | |
| रास | नगरीनिरंजन | 6 | |
| सहवास | निनाव | 3 | |
| ससा आणि कासव - | विदेश | 8 | |
| पुन्हा रात्र | निनाव | 9 |