कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ऐक ना साजणे | सोहम कामत | 24 | |
| (लिहितो विडंबन स्वतःच साठी) | ज्ञानोबाचे पैजार | 19 | |
| लिहितो कविता तुमच्यासाठी... | अत्रुप्त आत्मा | 26 | |
| खुळ्या सांजवेळा... | प्राजु | 21 | |
| कदंब | प्राजु | 36 | |
| तत्वा, तुझी किंमत बघ! | वेल्लाभट | 17 | |
| (काळी असे कुणाची) | ज्ञानोबाचे पैजार | 27 | |
| !! जीवना.. !! | कवि मानव | 2 | |
| कसा फुलताना दिसू? | चांदणे संदीप | 15 | |
| गेले.. द्यायचे राहुनी तुमचे 500 शें चे ते ऒझे | अत्रुप्त आत्मा | 11 | |
| शूर नेते | सोहम कामत | 1 | |
| मोदी सरकारने पाचशे हजाराची नोट बंद केली | पाषाणभेद | 2 | |
| मोदी सरकारने पाचशे हजाराची नोट बंद केली | पाषाणभेद | 0 | |
| मोदी सरकारने पाचशे हजाराची नोट बंद केली | पाषाणभेद | 0 | |
| मोदी सरकारने पाचशे हजाराची नोट बंद केली | पाषाणभेद | 0 | |
| ( काळा असे कुणाचा) | स्वामी संकेतानंद | 22 | |
| खुलता कळी खुलेना | अरुण मनोहर | 5 | |
| कल्पनेचे महेर | कवि मानव | 3 | |
| (पडुन आहे नोट अजुनी) | स्वामी संकेतानंद | 42 | |
| मनाच्या खिशात... | संदीप डांगे | 9 |