कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ऋतु आला ऋतु गेला | सांजसंध्या | 10 | |
| लागला मला छंद | शशिका॑त गराडे | 0 | |
| गुर्जी | चुकलामाकला | 21 | |
| मंतरलेली रात्र | सुमित_सौन्देकर | 0 | |
| वसंत | आनंदमयी | 8 | |
| रसज्ञ नरभक्षक | देवदत्त परुळेकर | 6 | |
| स्मशान शांततेची शिकवण | देवदत्त परुळेकर | 7 | |
| भाव तिथे देव | निनाद जोशी | 3 | |
| नक्षीची दुसरी बाजू.. | सूड | 91 | |
| ..नका जाऊ देऊ राया दुपार ही वाया.. | कानडाऊ योगेशु | 15 | |
| बस मी आणि बाळ | शब्दानुज | 5 | |
| आज अवसेची रात आहे.......... | एक एकटा एकटाच | 7 | |
| कविता- मेसेज... | प्रितम तोरवने | 26 | |
| भजन - भक्तीचा डिज्जे (विडंबन - फेविकॉल से) | वेल्लाभट | 14 | |
| भ्रष्ट झाला कोळसा | चुकलामाकला | 1 | |
| गर्भपातल्या रानी .....! | गंगाधर मुटे | 16 | |
| लयास गेले कधीच ते - | विदेश | 2 | |
| सोनुलं | ऊध्दव गावंडे | 6 | |
| दोन वात्रटिका (मार्च १५) | विवेकपटाईत | 1 | |
| घरी जाताना | शिव कन्या | 1 |