कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मृगजळ... | एक एकटा एकटाच | 1 | |
| तरीसुद्धा ... | पद्मश्री चित्रे | 3 | |
| मत्कविता चालली ही! | पदकि | 1 | |
| ढ | वेल्लाभट | 7 | |
| मि ही निळा रंग निळा,रंगांच्या बहुत कळा | अत्रुप्त आत्मा | 20 | |
| तुम्ही अनावर व्हा.... | शिव कन्या | 3 | |
| उंच भरारी घे पाखरा | shrivallabh Panchpor | 1 | |
| एके दिवशी | shrivallabh Panchpor | 6 | |
| पाऊस खच्चुनी हा "अत्ता" कशास देवा??? | अत्रुप्त आत्मा | 28 | |
| माहेरपण..... | चुकलामाकला | 11 | |
| आग | अवतार | 8 | |
| रूसली ही पोर .. | सांजसंध्या | 14 | |
| तुकाराम होणे | देवदत्त परुळेकर | 7 | |
| कातरवेळ...... | एक एकटा एकटाच | 4 | |
| भग्न अवशेष | कहर | 7 | |
| वेड तिच्या प्रीतीचे…… | निनाद जोशी | 3 | |
| सावल्यांनी पोळलो आहे इथे मी ... | drsunilahirrao | 13 | |
| कागाळी | विशाल कुलकर्णी | 14 | |
| पळ पळ राधे, आला कान्हा घेऊन ग पिचकारी - | विदेश | 6 | |
| ती मात्र ............ | एक एकटा एकटाच | 32 |