कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गावाकडची जुनाट आज्जी ..... | चुकलामाकला | 38 | |
| वैश्विक खाज नाही | गंगाधर मुटे | 8 | |
| माझा स्वभाव | Rajvardhan | 10 | |
| सैतानाच्या भात्यामधले चार बाण धारदार | पगला गजोधर | 8 | |
| पप्पू माझा लेकुरवाळा | लॉर्ड फॉकलन्ड | 6 | |
| ठळक माझी मेहुणी.... | चुकलामाकला | 47 | |
| किती सांगू मी सांगू कुणाला - युवराजान्च्या पुनरागमनाच्या आनन्दाप्रीत्यर्थ | लॉर्ड फॉकलन्ड | 18 | |
| नाऱ्या नाऱ्या | चुकलामाकला | 6 | |
| कुक्कुट शर्विलक-विलाप | चलत मुसाफिर | 18 | |
| वळ्ण | योगेश भालेकर | 3 | |
| आज मी आहे | Rajvardhan | 1 | |
| फणा | मित्रहो | 26 | |
| असा मी तसा मी | Rajvardhan | 4 | |
| दूर | योगेश भालेकर | 4 | |
| सासु...एक पुसटसं व्यक्तिमत्व | अश्विनि कोल्हे | 85 | |
| वाटले नव्हते कधी | नाहिद नालबंद | 13 | |
| पुरुशाचे अस्तित्व...! | संदीप डांगे | 34 | |
| स्रीचे अस्तित्व! | अश्विनि कोल्हे | 170 | |
| हरवला जीव तो … | अनामिक२४१० | 0 | |
| धोतर आणी डबा २ | शब्दानुज | 0 |