कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| हि दिल्ली हाय एक जतरा ... | विशाल कुलकर्णी | 9 | |
| तुला मी आठवतो का गं? | एक एकटा एकटाच | 27 | |
| कुछ अनमोल लोगो से रिश्ता रखता हूँ… | बहुगुणी | 35 | |
| ..... तो कृष्ण 'एकटा' होता ! | विशाल कुलकर्णी | 23 | |
| < नैराश्याकडे फाऊले> | जव्हेरगंज | 2 | |
| हे काय कमी काय? | शिव कन्या | 13 | |
| बाय | जव्हेरगंज | 9 | |
| वैराग्याकडे पाउले | शेखरमोघे | 6 | |
| विक्री गीत | भिंगरी | 36 | |
| आयटीची गोष्ट | यमन | 29 | |
| आवर्त | अरुण मनोहर | 17 | |
| रंगल्या रात्री अश्या | भैड्या | 15 | |
| चला अंताक्षरी खेळूया.... | माम्लेदारचा पन्खा | 457 | |
| लखलाभ! | रातराणी | 25 | |
| (तुझे पाशवी बोलणे ते अवेळी) | चतुरंग | 29 | |
| तू इथे असतीस तर....! | चांदणे संदीप | 21 | |
| लाघवी | विशाल कुलकर्णी | 15 | |
| गंड मार्गदर्शन काव्य- मार्फत प्रेरणा दायी हम्मा (आम्ही प्रेरणा देतो :) ) | माहितगार | 0 | |
| हलले "दु"कान | नाखु | 22 | |
| किती भाग्यवान आम्ही! | शिव कन्या | 8 |