कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आठवन | सुमित_सौन्देकर | 9 | |
| सुखी जग | शिव कन्या | 5 | |
| बेफाम बोलण्यात पह्यला माझा नंबर | माहितगार | 14 | |
| मन | शीतल जोशी | 14 | |
| अनाहत | स्वामी संकेतानंद | 19 | |
| (चरस गांजा अता मिळाल्या) | स्वामी संकेतानंद | 17 | |
| घर एकटे बागेसह...... | शिव कन्या | 5 | |
| होती एक नजर....... | एक एकटा एकटाच | 20 | |
| असमाधानाची | अर्थहीन | 13 | |
| .... आभास | शिव कन्या | 4 | |
| विद्ध | चलत मुसाफिर | 4 | |
| ती वेळ | सिध्दार्थ | 1 | |
| मिसळपावातील भय | पाटीलअमित | 32 | |
| मिसळपावातील भय | पाटीलअमित | 0 | |
| आमची 'कर्म'फळे | कॅप्टन जॅक स्पॅरो | 35 | |
| तिला सार काही कळत | दिनु गवळी | 0 | |
| मैत्र झुलवून बघ | गंगाधर मुटे | 17 | |
| <विडंबनः नसतेच मिपा हे जेव्हा...> | एस | 32 | |
| कळी | आनंदमयी | 7 | |
| अव्यक्त | रातराणी | 12 |