कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मित्रा | महासंग्राम | 7 | |
| तीर्थ | शिव कन्या | 0 | |
| कोणी राहत नाही... | अर्थहीन | 14 | |
| चाहुल | जव्हेरगंज | 7 | |
| धर्मगंड | संदीप ताम्हनकर | 1 | |
| अडगळीतला इतिहास | शीतल जोशी | 9 | |
| 'स्थितप्रज्ञ' | एस | 24 | |
| सलामी | जव्हेरगंज | 8 | |
| चेहरे | स्वामी संकेतानंद | 7 | |
| एक काली-पिली कविता | मनिष | 9 | |
| पण आई म्हणते की.............. | एक एकटा एकटाच | 23 | |
| एकांत | शिव कन्या | 4 | |
| कणा , हिंदी भावांतरण | कैलासवासी सोन्याबापु | 47 | |
| चारोळी: माणुसकीची भटकंती! | निमिष सोनार | 3 | |
| आज पुन्हा एकदा प्रेमात पडावे असे वाटतंय !!!! | शीतल जोशी | 12 | |
| तुझे मजवरी भाळणे ते अवेळी | विशाल कुलकर्णी | 36 | |
| तो क्या करे... अख्तर शिरानी यांची ग़ज़ल | वेल्लाभट | 18 | |
| नियती | विशाल कुलकर्णी | 9 | |
| ( दीडशे रे.....) | स्वामी संकेतानंद | 16 | |
| निरोप | शिव कन्या | 8 |