कथा
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| जपान रिटर्न्ड | सुबक ठेंगणी | 9 | |
| उगाच रात्रीचा …दिवस ..वगैरे, करून… | निखिलचं शाईपेन | 21 | |
| आयुष्यात येणार्या धूसरपणाला मी मानते. | श्रीकृष्ण सामंत | 3 | |
| एका छिद्रान्वेषी वैतागसम्राटाची डायरी... | भडकमकर मास्तर | 46 | |
| ग्रॅज्युएशन भाग-१ | मीनल | 27 | |
| हल्लाबोल -२ | अनंता | 13 | |
| प्रगती ? | विशाल कुलकर्णी | 4 | |
| झबडं - टोपलं | अरुण वडुलेकर | 23 | |
| हल्ला बोल | विनायक प्रभू | 22 | |
| जनावरांच्या सानिध्यात मिळणारी शांती. | श्रीकृष्ण सामंत | 10 | |
| सामना चालकांच्या डोळ्यांत अंजन | घोडीवाले वैद्य | 14 | |
| आपण सारे कोट्याधीश!..... नाही होणार! | आनंद घारे | 12 | |
| `गाडी` घसरली, सावरली... | आपला अभिजित | 11 | |
| कैफियत .... | बट्ट्याबोळ | 1 | |
| ऒळखीचे भेळवाले | सुबक ठेंगणी | 31 | |
| राष्ट्रवादी कॉंग्रेसच्या अस्ताची सुरवात? | भोचक | 7 | |
| जुन्यात जूनं अलौकिक औषध. | श्रीकृष्ण सामंत | 5 | |
| सुट्टी | विनायक प्रभू | 26 | |
| 'परा'कोटीला पोचलेल्या खरडवह्या : रसग्रहण | परिकथेतील राजकुमार | 61 | |
| उंदीरनामा | सुबक ठेंगणी | 25 |