कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| सांगा असतो का कधी मी माझा? | निमिष सोनार | 14 | |
| तिची साधीशी कविता | प्रसाद गोडबोले | 30 | |
| सोनसाखळी | मारवा | 5 | |
| पाण्यासारखी... | माधुरी विनायक | 3 | |
| धोतर आणि तांब्या | शब्दानुज | 68 | |
| क्षण तो..... | psajid | 2 | |
| सकाळी सकाळी कोठे वेळ असतो ....!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| सीट | मित्रहो | 13 | |
| आम्ही अस्पृश्याची पोरे | देवदत्त परुळेकर | 5 | |
| माणुसकी | माम्लेदारचा पन्खा | 7 | |
| सगळीकडे नुसती चर्चा ब्रँड आणि फक्त....... ब्रँडची | सार्थबोध | 10 | |
| एका विचारवंताचा सल्ला... | चंद्रनील मुल्हेरकर | 12 | |
| कधी कधी | वेल्लाभट | 6 | |
| एकांत | सार्थबोध | 3 | |
| स्वर तुझा | प्रकाश१११ | 3 | |
| मॅटिनी | अविनाशकुलकर्णी | 25 | |
| नको .. | गवि | 18 | |
| (पडुन आहे सार्त्र अजुनी) | स्वामी संकेतानंद | 24 | |
| स्वप्नांचे पान मुंबई | गणेशा | 12 | |
| (पाठ शिवा हो पाठ शिवा) | सूड | 19 |