कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| .....रिप रिप रिप ! ! | फिझा | 3 | |
| गुलाम | सुर्या गार्डी | 14 | |
| वात्रटिका- अभियान स्वच्छता | विवेकपटाईत | 9 | |
| अजुनी बसून आहे | विदेश | 13 | |
| ( ओळखलत का साहेब मला?) | अमोल केळकर | 13 | |
| एक उदास कंटाळवाना चेहरा | प्रकाश१११ | 1 | |
| दर्शनता! | अत्रुप्त आत्मा | 26 | |
| बरळप्रहरी.. | गवि | 20 | |
| शब्द | पाषाणभेद | 7 | |
| चांदणी | सुर्या गार्डी | 12 | |
| (दोन दिवस मुंबईत गेले,दोन दिल्लीत गेले) | अमोल केळकर | 7 | |
| आजोबा...!! | प्रकाश१११ | 1 | |
| गजरा | सुर्या गार्डी | 9 | |
| ताज्या क्षणिका – सत्तेचा आनंद, नागपुरी संत्रा आणि टोल | विवेकपटाईत | 8 | |
| तुझी सोबत....... | माझं आभाळ | 12 | |
| घेऊन जा | सह्यमित्र | 7 | |
| पंचप्राण | चलत मुसाफिर | 10 | |
| तसे देव मोकळेच असतात..!! | प्रकाश१११ | 7 | |
| दिवाळी - वैचारिक क्षणिका | विवेकपटाईत | 2 | |
| कारुण्य टंकन | निराकार गाढव | 49 |