कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गुलमोहर मोहरतो तेव्हा | मनमेघ | 2 | |
| रियल रियल | शिव कन्या | 4 | |
| (प्रार्थना!) | गड्डा झब्बू | 2 | |
| बहावा | बिपीन सुरेश सांगळे | 7 | |
| सोनसंध्या | इरामयी | 1 | |
| (उष:काल) | ज्ञानोबाचे पैजार | 6 | |
| धून वाजवी बासरीवाला | बिपीन सुरेश सांगळे | 2 | |
| भयकाल | शिव कन्या | 3 | |
| बरवा विठ्ठल ,बडवा विठ्ठल...जुडवा विठ्ठल . | बाजीगर | 1 | |
| थांबवावे कुणाला मी | आकाश५०८९ | 3 | |
| तुझ्याविनाही खराच आहे | आकाश५०८९ | 0 | |
| होत नाही कपातला चहा गार आता | आकाश५०८९ | 4 | |
| चेहरा हसराच आहे | आकाश५०८९ | 0 | |
| माझे मन पाही | पाषाणभेद | 0 | |
| मी मोठ्ठा की लहान? | पाषाणभेद | 1 | |
| स्वामि धागे घेऊन येतात | सोन्या बागलाणकर | 48 | |
| प्रेम... | माम्लेदारचा पन्खा | 3 | |
| प्रार्थना! | मनमेघ | 9 | |
| [माणसे इंजिनिअर होऊन येतात] | मराठी कथालेखक | 4 | |
| एका शहीद सैनिकाच्या पत्नीचे मनोगत | बिपीन सुरेश सांगळे | 0 |