कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| कैद तिच्या डोळ्यात दिगंतर असते .. | drsunilahirrao | 6 | |
| शहरातुन गावाकडे...........! | एकप्रवासी | 4 | |
| योद्धा | चाणक्य | 20 | |
| (अशी कबुतरे येती) | स्वामी संकेतानंद | 7 | |
| संध्याछाया.. | अत्रुप्त आत्मा | 51 | |
| तू आणि मी | प्रसाद_कुलकर्णी | 19 | |
| (जालाचे भामटं) | स्वामी संकेतानंद | 12 | |
| (बाटा रुते कुणाला) | स्वामी संकेतानंद | 38 | |
| (महवांची गाळ फुले) | स्वामी संकेतानंद | 6 | |
| शेतकऱ्याच्या तळतळाटानेच तुमचं स्टेज पेटलं | गणेश उमाजी पाजवे | 81 | |
| मोहब्बत.. | विनायक पन्त | 15 | |
| मेहबूब मेरे... | विनायक पन्त | 18 | |
| रात्रीस भेळ चाले | मूखदूर्बळ | 10 | |
| आपल्याकडे बुवा असलेच काही तरी असते.. | पिके से पिके तक.. | 3 | |
| तृप्ती | स्वामी संकेतानंद | 7 | |
| दुनियादारी.... | पिके से पिके तक.. | 10 | |
| शब्दकोश | सुचिकांत | 1 | |
| खेकडा | सुरवंट | 1 | |
| भिंतीपल्याड जग असतं... | वेल्लाभट | 9 | |
| एका कातरवेळी ………. | एकप्रवासी | 13 |